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मीनाक्षी लेखी बोलीं कुरान में तीन तलाक का कोई उल्लेख नहीं

नई दिल्ली। विपक्षी पार्टियों के विरोध के चलते लंबे अरसे से अटका तत्काल तीन तलाक विधेयक आज लोकसभा से पारित हो सकता है। हालांकि, इसके सर्वसम्मति से पारित होने की उम्मीद कम है। कांग्रेस कुछ सवालों के साथ इसका समर्थन कर सकती है, जबकि तृणमूल कांग्रेस का विरोध कायम रह सकता है।

भाजपा और कांग्रेस ने अपने सांसदों को संसद में मौजूद रहने के लिए व्हिप किया। लोकसभा में सरकार के बहुमत को देखते हुए माना जा रहा है कि आज यह विधेयक पारित हो जाएगा। एआईएडीएमके के अंवर राजा ने कहा कि भारत में शिक्षा और पिछड़ेपन के लिए तमाम सर्वे किए गए हैं, लेकिन किसी भी स्टडी में ट्रिपल तलाक को मुस्लिम समाज के पिछड़ेपन का कारण नहीं माना गया, इसलिए बिल की कोई जरूरत नहीं है।

इस बिल से महिलाओं का कुछ भला नहीं होगा, बल्कि वे कमजोर हो जाएंगी। यह बिल मौलिक अधिकारों का हनन है, इससे मुस्लिम मर्दों का शोषण होगा और उनके परिवार बिखर जाएंगे।

मीनाक्षी लेखी ने कहा कि हिंदुओं के कानूनों को जो लोग हवाला दे रहे हैं उन्हें पता होना चाहिए कि 1955 के कानून से पहले हिंन्दुओं में तलाक होता ही नहीं था।

भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि जो लोग सबरीमाला का शोर मचा रहे हैं उन्हें बताना चाहती हूं कि सबरीमाला का मामला बिल्‍कुल अलग है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस बात को माना है। कुरान में तीन तलाक़ का कोई भी उल्लेख और प्रावधान नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे गैरसंवैधानिक माना है।

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रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘ये बिल किसी समुदाय, धर्म या उसकी आस्था के खिलाफ नहीं है। यह बिल महिलाओं के अधिकारों और उन्हें न्याय दिलाने के लिए है। प्रसाद ने पूछा कि अभी तक दुनिया के 20 इस्लामिक देश तीन तलाक पर रोक लगा चुके हैं तो भारत जैसा सेक्युलर देश क्यों नहीं लगा सकता?. प्रसाद ने कहा कि इस बिल पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंधोपाध्याय ने लोकसभा में कहा, ‘हम भी ट्रिपल तलाक बिल को संयुक्त सेलेक्ट कमेटी के पास भेजे जाने का आग्रह करते हैं। समूचा विपक्ष यही चाहता है।’

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने ट्रिपल तलाक बिल पर लोकसभा में कहा, ‘यह बेहद अहम बिल है, जिस पर विस्तृत अध्ययन किया जाने की ज़रूरत है। यह संवैधानिक मामला भी है। इसीलिए अनुरोध करता हूं कि बिल को संयुक्त सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए।’

तीन तलाक विधेयक राजनीतिक रूप से भी बहुत अहम है। भाजपा इसके जरिए महिलाओं की बराबरी के मुद्दे को ऊपर रखना चाहती है। वहीं पीड़ित मुस्लिम महिलाओं की मदद करने के लिए जमीनी स्तर पर महिला मोर्चा और युवा मोर्चा को तैनात किया गया है। इसे मुस्लिम महिलाओं को अपने पक्ष में करने की कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है।

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