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राम जानकी की विदाई पर श्रोताओं के छलके आँसू

औरैया। सुप्रसिद्ध महावीर धाम पर मंगलवार को श्री कथा महोत्सव के अंतिम दिन राम जनकी की विदाई की कथा सुनाई गई। रामजनकी की विदाई की कथा सुनकर श्रोताओं की आंखे छलक उठी और राम जानकी की विदाई की झांकी देखकर खचाखच भरे पण्डाल में श्रोताओं ने पुष्प वर्षा की। कस्बे के महावीर धाम पर चल रही श्रीराम कथा महोत्सव में मंगलवार को अंतिम दिन राम जनकी की विदाई की कथा सुनाते हुए।

वृन्दावन से पधारे राम कथा वाचक रामसखा जू महाराज ने रामजानकी की विदाई की कथा सुनाते हुए कहा कि राजा जनक के महल में माता सीता का रुदन सुनकर राजा जनक व उनकी पत्नी भी रोने लगी।

राजा जनक व उनकी पत्नी को रोता देख महल में मौजूद जनमानस की भी आँखे छलक उठी।राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता को भगवान श्री राम के साथ महल के द्वार पर ले आये। और दुल्हन की डोली में सीता माता को बैठाकर विदा किया। सीता जी को लोकरीति वेदरीति के साथ जनक पूरी से विदा किया गया। भगवान राम का रथ आयोध्या के लिए प्रस्थान करने लगा और उनके पीछे उनके छोटे भाईयों का रथ और सीता माता की डोली चलने लगी भगवान राम का रथ जनक पूरी की जिस गली से गुजरता वहां के लोग सीता माता को देखने के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ता था।

और उनके आंखों से आसुओं की रस धारा बहने लगती थी। बारात धीरे धीरे अयोध्या नगरी की जिस गली से गुजरी उस गली में अयोध्यावासी उन पर पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत करते। बारात गलियों से गुजरते हुए राजा दशरथ के महल से पहुँची। जहाँ पर पहले से महल की भव्य सजावट थी।

और भगवान राम की तीनों माताएं आरती की थाल लिए स्वागत के लिए खड़ी थी। जैसे ही बारात महल के द्वार पर पहुँची तो दुल्हन बनी सीता जी का स्वागत कर महल में ले गई। माता सीता को अयोध्या नगरी में देख कर अयोध्यावासियों में खुशी की लहर दौड़ गई। श्री राम कथा महोत्सव के आयोजकों ने बताया कि विशाल भण्डारा 03 अप्रैल दिन बुधबार को 3 बजे से शुरू होगा। कस्बा व क्षेत्रवासियों से भारी संख्या में प्रसाद ग्रहण करने की अपील की है।

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