East Writer

नई द‍िल्ली। आज पंजाब के ज‍िन क‍िसानों ने कृष‍ि-कानूनों पर बवाल मचाया हुआ है, उसी प्रदेश में सर्वाध‍िक ‘फर्जी क‍िसानों” ने पीएम क‍िसान योजना का अवैध तरीके से लाभ ल‍िया। आरटीआई (RTI) में म‍िली जानकारी के अनुसार 2019 में शुरू हुई पीएम-किसान योजना (PM-Kisan Yojana) में जुलाई 2020 तक अयोग्य लाभार्थियों (Unqualified beneficiaries) को 1,364 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया जिसमें सबसे अधिक अयोग्य लाभार्थी पंजाब (Punjab) के रहने वाले हैं।

अयोग्य लाभार्थियों से राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू- आरटीआई RTI आवेदन के जवाब में केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने बताया कि अयोग्य लाभार्थियों की दो श्रेणियों की पहचान की गई है जिनमें पहले ‘अर्हता पूरी नहीं करने वाले किसान’ हैं जबकि दूसरी श्रेणी ‘आयकर भरने वाले किसानों’ की है. कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (CHRI) से संबद्ध आरटीआई आवेदक वेंकटेश नायक ने ये आंकड़े सरकार से प्राप्त किए हैं. उन्होंने कहा, ‘अयोग्य लाभार्थियों में आधे से अधिक (55.58 प्रतिशत) ‘ आयकरदाता’ की श्रेणी में हैं. नायक ने कहा, ‘बाकी 44.41 प्रतिशत वे किसान हैं जो योजना की अर्हता पूरी नहीं करते हैं.’ उन्होंने बताया कि मीडिया में आई खबर के मुताबिक अयोग्य लाभार्थियों को भुगतान की गई राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

पंजाब में सबसे ज्यादा अयोग्य लाभार्थी- नायक ने कहा कि सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के तहत प्राप्त सूचना से पता चलता है कि वर्ष 2019 में शुरू हुई पीएम-किसान योजना के तहत जुलाई 2020 तक अयोग्य लाभार्थियों को 1,364 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. उन्होंने कहा, ‘सरकार के अपने आंकड़े संकेत देते हैं कि राशि गलत हाथों में गई.’ आरटीआई आवेदक ने बताया कि आंकड़ों के मुताबिक अयोग्य लाभार्थियों की बड़ी संख्या पांच राज्यों- पंजाब, असम, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश में है.

क्या है प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 20.48 लाख अयोग्य लाभार्थियों को 1,364 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है. यह जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई सूचना के जवाब में दी है. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की शुरुआत केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में की थी और इसके तहत सीमांत या छोटे किसानों या जिनके पास दो हेक्टेयर से कम कृषि भूमि है, उन्हें साल में तीन बराबर-बराबर किस्तों में कुल छह हजार रुपये की राशि दी जाती है.

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